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كلمتين وقلب : حق مشروع !!

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بقلم  : سماح  المحمدى

_        كل  انسان  يعيش  له  حقوق وعليه  واجبات  تسطر  طريقه اينما كان  منذ   ميلاده  حتي  وفاته ومن أهم   حقوق   الإنسان  هي   الكرامه والرفاهية    وأقصد    بالرفاهية   أن يعيش    حياته.    متمتعا    بحقوقه وهذا  ماقامت   به   الدوله المصريه عندما    تبنت    اكبر    مشروع  في تاريخها الحديث وهو  تطوير  الريف المصري بمشروع حياه كريمه .

_  هذا   المشروع   قامت  به  الدوله المصريه لتغير  خريطه  مصر  كامله بخلق   ريف   مصري   يتمتع     بكل الحقوق من حياه مستقره  اقتصاديا واجتماعيا أحييت روح الانتماء  من خلالها    بتطوير     الريف   المصري واعاده    جماله    مره    اخري   من مشروعات  ري   وصرف    وخدمات تعليميه وصحيه الي جانب ربط  كل قريه   وتوابعها   بأقرب   مركز    لها وتوفير   ما تحتاجه    من   خدمات  بالاضافه   الي   تغير   ملامح صعيد مصر    بمشروع   تنميه   محافظات الصعيد  الذي حول  الصعيد المصري من مكان  لمكان آخر ….كل هذا  الي جانب    مبادره    التمويل    العقاري لمحدودي    الدخل    بخلق    تكامل اقتصادي مع البنوك المصريه  لتوفير قروض   لفائده   محدوده    للشباب أليس كل هذا  هو رد   اعتبار     عن سنوات عشوائيه ..

_      لقد  منحنا الله  رئيسا   يبحث عما يسعد به شعبه متمتعا بالبساطة والرقي   فى  الحديث   الي  الجانب الإنساني فمنذ  ايام  حدثت   مشكله المواطن  وابنته  مع كمسري  القطار فرد  الرئيس   له   اعتباره    بدعوته ليجلس   معه  بالمؤتمر  الاول لحياه كريمه هذا  هو  الحق   المشروع  أن يجد كل مواطن ما يدافع  عنه ويرد له اعتباره وحقه  في أبسط   نواحي الحياه .

_      شاهدت        فديو         لقصه مشهوره     عن   كيفية     لا  نحكم  علي الكتاب  من غلافه  ولا  تسرقنا الوانه  يحكى  عن  مواطن  أمريكي متغطرس   كان   من   ضمن   ركاب  احدى   الطائرات  وجلس  يقراٌ  فى  كتاب  وبجواره  مواطن آخر  بسيط فتعامل  معه   بكل  تعالي   وعندما  سأله عما يقرأ   اٌجابه  هذا  المغرور  بأنه   لا دخل  لك  بما    اُقراُه   لانه   اٌعلي  من  مستوي  ذكاءك   فسكت هذا   المواطن  البسيط   ولم  يعلق   وحين جاءت  المضيفه  لتقدم  لهما مشروبات  لاحظت  مابينهما  فكانت النتيجه   أنها    قد    استاءت    من    معاملة  هذا  الشخص لمن   يجلس بجواره     وأقصد     هنا    المواطن البسيط   فما   كان  منها أن أخبرت   قبطان   الطائرة  بما  حدث  فاٌمرها أن  تنقل  هذا  المواطن  الي الدرجة المميزة  لأنه  بالفعل   يستحق   ذلك وعندما همَ بالرحيل أخبر من يجلس بجواره أنه عندما سأله  عن   الكتاب لم يقصد أن يقتحم خصوصيته لانه هو   نفسه    مؤلف  ذلك    الكتاب !! فليس شرطا أن  تكون صاحب  علم وتتنمر  بمن  يقل عنك  ذكاءا  لذلك   لا تحكم علي اٌي كتاب من غلافه .

_       هذا ما حدث منذ سبع سنوات فقد  بدأنا رحله شاقه   اجتزنا   فيها الكثير من  الصعاب  وبفضل      الله والقيادة  الرشيدة  للرئيس  السيسي عبر  بنا كشعب  من  وضع  اقتصادي ضعيف  الي دولة  قوية   تقوم  الآن بتطوير    أكثر   من    نصف    القرى المصرية   انه   قرار  جريء   وقوي  من شخصية سيسطر  عنها  التاريخ   كتبا ومجلات  وعندما    افكر فيما   تم  خلال هذه السنوات  اٌقول  إننا   فعلا    علي      اٌعتاب    الجمهورية الجديدة .. لقد أخذنا حقنا المشروع  علي  يد   قائد  يحب شعبه وجيشه أكثر  من  نفسه!! .

_    سيدي الرئيس أنحني لك تقديرا واحتراما .. لقد   ترك    لنا   الفراعنة أهرامات  لا نعرف   كيف  تم  بناءها واٌنت صاحب الفكر والقوة الحديدية بنيت   لنا   جمهورية  اٌقوى من  تلك الاهرامات …..شكرا   لك ولكل    من يعاونك في حب  مصر  …..  واُتمني يوما أن اقابلك  لانك   قيمة  مضافة لكل مصرى ومصرية……..حمي الله مصر  وحمي  قائدها   وتحيا   مصر، تحيا   مصر  ،،،،

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